MSEDCL Battery Storage Project: महाराष्ट्र में बैटरी से 1,000 MWh बिजली सप्लाई, भारत में पहली बार बना रिकॉर्ड

Nikhil Singh
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MSEDCL Battery Storage Project: महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) ने बैटरी स्टोरेज के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली उपलब्ध कराने के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के अनुसार, विकेंद्रित बैटरी स्टोरेज नेटवर्क के माध्यम से अब तक 1,000 मेगावाट-घंटे (MWh) बिजली की आपूर्ति की जा चुकी है। MSEDCL का दावा है कि इस स्तर पर विकेंद्रित बैटरी स्टोरेज के जरिए बिजली उपलब्ध कराने वाली वह देश की पहली बिजली वितरण कंपनी है। MSEDCL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र ने बताया कि यह व्यवस्था राज्य में बिजली की बढ़ती मांग के दौरान काफी उपयोगी साबित हो रही है। खासकर अक्टूबर में गर्मी बढ़ने और सूखे की स्थिति के कारण बिजली की मांग पर दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में बैटरी स्टोरेज के जरिए शाम के घंटों में बिजली उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो गया है।

MSEDCL Battery Storage Project: दिन की सौर ऊर्जा अब शाम को भी आएगी काम

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर संचालित ‘मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0’ के तहत विकेंद्रित सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 7,000 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। इनसे पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल कृषि पंपों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। दिन के समय सौर ऊर्जा पर्याप्त और अपेक्षाकृत किफायती बिजली उपलब्ध कराती है। लेकिन सूर्यास्त के बाद सौर उत्पादन बंद होने पर बिजली की मांग पूरी करने के लिए अन्य स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है, जिसकी कीमत अधिक हो सकती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए MSEDCL ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) शुरू किया है। इस व्यवस्था में दिन के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त सौर बिजली को बैटरियों में जमा किया जाता है और शाम के समय मांग बढ़ने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। इससे महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम करने और बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। MSEDCL Battery Storage Project

500 MW की क्षमता, दो घंटे तक बिजली सप्लाई

MSEDCL के अनुसार, फिलहाल 500 मेगावाट (MW) क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम चालू हो चुका है। यह व्यवस्था दो घंटे तक बिजली उपलब्ध करा सकती है। इस हिसाब से इसकी ऊर्जा भंडारण क्षमता 1,000 MWh होती है। राज्य में ये बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं 50 अलग-अलग स्थानों पर स्थापित की गई हैं। प्रत्येक स्थान पर 10 MW क्षमता का बैटरी सिस्टम लगाया गया है। विकेंद्रित नेटवर्क होने से बिजली को जरूरत के समय वितरण व्यवस्था में उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। कंपनी का कहना है कि यह व्यवस्था केवल कृषि उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि बिजली उपभोक्ताओं की अन्य श्रेणियों के लिए भी उपयोगी है। इससे शाम के पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता बेहतर बनाने और बिजली खरीदने की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

MSEDCL Battery Storage Project: दिसंबर तक बढ़ेगी बैटरी स्टोरेज क्षमता

MSEDCL ने कुल 750 MW क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं स्थापित करने की योजना बनाई है। ये परियोजनाएं दो घंटे तक बिजली उपलब्ध कराने के आधार पर कुल 1,500 MWh ऊर्जा भंडारण क्षमता प्रदान कर सकती हैं। कंपनी के मुताबिक, शेष परियोजनाओं को दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, 4,000 MWh की अतिरिक्त ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। इन योजनाओं के पूरा होने से राज्य की बिजली व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने और शाम के समय बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।

MSEDCL Battery Storage Project: गर्मियों में भी मिल सकता है फायदा

अक्टूबर में बढ़ती गर्मी और बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच बैटरी स्टोरेज व्यवस्था महाराष्ट्र के लिए अहम साबित हो सकती है। आने वाली गर्मियों में जब एयर कंडीशनर, पंखे और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल से बिजली की मांग बढ़ेगी, तब दिन में स्टोर की गई सौर ऊर्जा का शाम को इस्तेमाल उपयोगी होगा। हालांकि, इस पहल का वास्तविक आर्थिक लाभ बिजली की खरीद लागत, बैटरी संचालन और भंडारण की दक्षता पर निर्भर करेगा। फिर भी, नवीकरणीय ऊर्जा को स्टोर करके जरूरत के समय इस्तेमाल करने की यह व्यवस्था महाराष्ट्र की बिजली आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। MSEDCL की यह पहल दिखाती है कि सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज को एक साथ इस्तेमाल करके बिजली की उपलब्धता बेहतर बनाई जा सकती है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो राज्य में शाम के पीक आवर्स के दौरान बिजली प्रबंधन को और मजबूती मिल सकती है।

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Nikhil Singh is a Senior Correspondent at The ESG India, covering ESG, CSR, sustainability and government policy across India. He reports on corporate accountability, climate action and social impact.